Dar lagta hai- A small poem

Message picture do not belong to me

Dar lagta hai is a poem and my first ever, written last year on my parents anniversary.

It’s their anniversary today and I am super thrilled to celebrate 35 years of togetherness…

 

I can never imagine I can write a poem,  but love can make you do anything so I can write a poem.


Dar lagata hai….

डर लगता है कि कहिं भगवन मुझ्से नराज़ ना होजाए,
क्योँकि उससे ज्यादा मैं तुम्हे पूजती हूँ;
फिर याद अाता है कि, उसीसे तुम्हारा साया मिला है, तुमतोह उसके ही रूप हो |

डर लगता है कि कहिं तुम मुझसे उदास न होजाओ,
मेरी कोई बात तुम्हे नाह चुभ जाये;
फिर याद अाता है कि,अपनी ज्यादा तुम मुझसे प्यार करते हो, मुझे बहुत चाहते हो |

डर लगता है कि कहिं तुमसे दूर न होजाओ,
तुम्हे एक पल देखने को तरस जाऊं;
फिर याद अाता है कि, तुमसे ही तोह मैं हूँ, मेरी रोम रोम मैं तुमहो |

डर लगता है कि मेरी संतान को सही परवरिश दे पाउंगी क्या,
वह लड़ वह दुलार दे पाउंगी;
फिर याद अाता है कि, तुम्हारे ही संस्कार उन्हें देने है, तुम्हारी ही परछाई हूँ मैं |

तुम्हे भेजा गया है मेरे लिए
तुम्हे एक दूजे से मिलाया है मेरे लिए |
मैं हर जनम मैं अगर बेटी बनूँ,
तोह माता- पिता तुम्हे ही भेजे मेरे लिए |

एक खूबसूरत जोड़े को शादी की ढेर सारी शुभकामनाये |

 

Poem
Written on a piece of paper today last year

 

The message picture is from the internet rest of them I own.
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